गुरुवार, 28 अगस्त 2014

ओसामा की मृत्यु पर



यह युद्ध-बोध या युवा बोध—
मानवता का यह संघर्ष अगर
मानवता का है बोध कहाँ..?
संघर्ष और करुणा का ,
गर मिलन  हुआ होता ही कभी,
बुद्धत्व प्राप्ति के लिए जगत में
तप की होती खोज नहीं।

यह अहं-बोध का चरम राग,
वीरत्व भाव का नृत्य विराट्
 य़ह शक्ति बोध का चरम विलास
भय चरम ,चरम आतंक मात्र
या युवा-शक्ति का चरम लक्ष्य,,?
यह विश्व –शक्तिका प्रलय- प्रलाप-
सह सकता नहीं अणु –बोध भार—
गर रावण की इस मृत्यु-कथा,
नित –नित दुहरायी जाने पर
 नित नया वेश नव रावण का ,
विन्यस्त न हो पाता तो अहा !!
यह वैर भाव यह  शत्रु-भाव,
यह शत्रु –भाव का विजय गान—
यह कहीं नहीं मनुज कल्याण।च
कलियुग का रावण मरा आज,,
होसके र2म का सहज राज्य..
शक्ति को आखिर लास्य भाव,
सर्जन क्यों करना हुआ आह--!
तांडव नर्तन का महाभार
शिव कृत्य शोध का महा भार
कयों सह न सका कोमल संसार?

यह शक्ति गर्व का विकट हास-।
यौवन पर जब शक्ति का मद
इतराता फिरता क्रुद्ध,प्रबुद्ध—
तब तब प्रमत्त हो चौंकाता
करता फिरता है अट्टहास।
यह महारास..।

आशा सहाय----------------------3-5-2011--।

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