गीत चुरायें---
आओ मन के गीत चुरायें.
मधुर मधुर सुन्दर भावौं के,
वीणा के सजते तारौं के,
सुन्दर सुन्दर रागौं से युत
दिवस रात के गीत चुरायें.
आओ मन के गीत चुरायें.
आऔ सबके प्यारचुरायें
निर्जन वन वन उपवम उपवन,
घास फूस कीकोठरियों से
धूल-घूसरित, रोते- गाते
वच्चों को हम खींच निकालें
आओ उनके प्यार चुरायें.
पर्वत-पर्वत,खोह-खाइयों से
धॅसे, धवल थकित,नयनों के
उज्ज्वल मन मैले वसनों के
शिशुओं को हम गले लगायें
उनकेमीठे बोल चुरायें,
आओ उनकेप्यार चुरायें...
आशा सहाय.....
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