रविवार, 31 अगस्त 2014

कविता



कविता क्या केवल तल्खी है
क्रन्दन है रूठे बिछड़ों का?
वचनों,मन से कर्मों से जो,
जीवन-सुन्दरता को बुनते...
उनको भी तो अभिव्यक्ति दो ।
कविता क्या व्यथा कथा केवल
जग से हारे की जथा केवल
कविता क्या संवेदन- छलना है..?
जो जीत गये संघर्षों मे
सुख को उनके अभिव्यक्ति दो।

गर हास्य, व्यंग्य, करुणा ही बस
है मृदुल काव्य का विषय बना...
आह्लादन सुख का कहाँ धरा...
?
आधी अनुभूति जीवन की
कलमों से तुम वंचित न करो
सुख को  उनके अभिव्यक्ति दो..।

जीवन में सु है शान्ति भी है
संघर्षों की गर कथा कहो
उस शान्ति को भी अभिव्यक्ति दो..
कारुण्य,दुःखों के बुद्बुद में
वीचि-विलास केचित्त प्रसार को
नयनों की ओट न होने दो
चिन्मसता और जीवंत शान्ति को
रसमयता में घुल जाने दो
उनको भी तो अभिव्यक्ति दो।...

आशा सहाय...5-12-2002--। ,

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें